Bible Study Helper प्रश्न और उत्तर

बाइबिल कष्टों के बारे में क्या कहती है?

बाइबल से उत्तर, आपकी भाषा में।

बाइबिल हमें सिखाती है कि कष्ट इस संसार में एक वास्तविकता है, लेकिन इसमें एक अनमोल उद्देश्य और आशा भी है। यीशु मसीह ने खुद अपने जीवन में कष्ट सहे, और वह हमारे कष्टों को समझते हैं। इब्रानियों 4:15 कहता है कि हमारे महायाजक यीशु ने हर प्रकार की परीक्षा का सामना किया, लेकिन बिना पाप के।

जब हम कष्ट में होते हैं, तो यह हमें परमेश्वर के और निकट लाने का अवसर होता है। रोमियों 5:3-4 हमें याद दिलाते हैं कि कष्ट धैर्य उत्पन्न करता है; धैर्य से चरित्र और चरित्र से आशा। यह आशा हमें निराश नहीं करती, क्योंकि परमेश्वर का प्रेम हमारे दिलों में पवित्र आत्मा के द्वारा बहाया गया है।

कष्ट हमें सिखाते हैं कि हम अपनी सामर्थ्य पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की अनंत शक्ति पर निर्भर रहें। यह हमें विनम्र बनाता है और हमें यह अनुभव करने में मदद करता है कि परमेश्वर हमारा सच्चा सहारा और आश्रय है। आखिरकार, याकूब 1:2-3 हमें प्रोत्साहित करता है कि हम कष्टों को सर्वथा आनंद की बात मानें, क्योंकि इससे हमारा विश्वास परखा जाता है और धैर्यपूर्ण बनता है।

इसलिए, बाइबिल के अनुसार, कष्ट का सामना करते समय, हम विश्वास में दृढ़ रहें और जानें कि परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमें अंत तक संभालेगा। यीशु में हमारा स्थाई सहारा और आशा है।

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